उप-प्राचार्य की कलम से ...
महाविद्यालय : एक परिचय ...
हिन्दू-मुस्लिम संस्कृति के समन्वय का ज्वलन्त प्रतीक टोंक, राजस्थान की राजधानी जयपुर के दक्षिण पिश्चम में राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 12 पर 100 किलोमीटर दूर बनास नदी के तट पर स्थित जिला मुख्यालय है। यह नगर प्रारम्भ में एक पहाड़ी `रसिया की टेकरी´ की तलहटी में बसा था जो पहले `टूकड़ा´ कहलाया, फिर `टूक´ और तदनन्तर टोंक के नाम से प्रसिद्ध हुआ। प्राचीनकाल से ही टोंक की यह धरा इतिहास में चर्चित रही है। सन् 1817 से 131 वषों तक विख्यात अमीर खां के वंशजों ने टोंक रियासत पर शासन किया। मई, 1948 में टोंक रियासत का राजस्थान राज्य में विलीनीकरण हो गया। यहाँ के दर्शनीय स्थलों में स्थानीय अन्नपूर्णा डूंगरी, रसिया की टेकरी, सुनहरी कोठी, अरबी-फारसी शोध-संस्थान, दयिाशाह की बावड़ी, पुरानी टोंक के जुड़वा मिन्दर-मिस्जद आदि प्रमुख है। यहाँ के पर्यटन स्थलों में टोडारायसिंह, राजमहल, बीसलपुर बांध, ककोड़ का किला, डिग्गी के श्री कल्याणजी, वनस्थली विद्यापीठ एवं अरबी-फारसी शोध संस्थान उल्लेखनीय है। दासता की तिमिराच्छन्न निशा की समाप्ति और स्वतन्त्रता के देदीप्यमान दिनकर के उदय के साथ ही ज्ञान का प्रसारण हुआ। उसी के अन्तर्गत 1952 में टोंक में उच्च शिक्षा के लिए कोठी नातमाम में कला संकाय में दरबार इंटरमीडियट कॉलेज आरम्भ हुआ। तत्पश्चात् 1957 में वाणिज्य संकाय तथा 1966 में विज्ञान संकाय में अध्यापन प्रारम्भ होने के साथ ही यह संस्था पूर्ण स्नातक स्तरीय महाविद्यालय में परिवर्तित हो गई। 1977 में यह महाविद्यालय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के रूप में क्रमोन्नत हुआ जिसमें उर्दू एवं अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर कक्षाएँ प्रारम्भ हुई। तदनन्तर यहां स्नातक एंव स्नातकोत्तर स्तर पर अनेक नवीन विषयों का अध्ययन प्रारम्भ होता गया और आज इस महाविद्यालय में स्नातक स्तर पर 19 विषयों में तथा स्नातकोत्तर स्तर पर 12 विषयों में अध्यापन की सुविधा उपलब्ध है।
अपने स्थापना काल से लेकर आज तक यह महाविद्यालय निरन्तर प्रगति के पथ पर अग्रसर है। प्रगति के इन वर्तमान आयामों को देखते हुए भविष्य में प्रगति की प्रबल सम्भावनाएँ दृष्टिगोचन होती है। यह महाविद्यालय महिर्ष दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय अजमेर से सम्बद्ध है जहाँ उत्कृष्ट शिक्षा के साथ ही शोध कार्य भी सम्पन्न करवाया जाता है। वर्तमान में महाविद्यालय में प्राचार्य व उपाचार्य के अतिरिक्त 85 प्राध्यापकों के पद हैं। जिनमें 32 पी-एच.डी तथा 26 एम.फिल. है। कई पी-एच.डी. कार्य में लगे है। इसके अतिरिक्त यहां पुस्तकालयाध्यक्ष तथा सहायक पुस्तकालयाध्यक्ष के पद है। कार्यालय स्टाम में 8 मंत्रालयिक, 4 अधीनस्थ तृतीय 16 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी कार्यरत है। मैं आशा करता हूँ कि प्राचार्य महोदय के आशीर्वाद तथा शैक्षणिक एवं अशैक्षणिक साथियों के सहयोग से यह महाविद्यालय विद्यार्थियों के सम्पूर्ण विकास की ओर निरनतर अग्रसर रहेगा।