राष्ट्रीय सेवा योजना (एन.एस.एस.)
एन.एस.एस. का गांधी शताब्दी वर्ष में शुभारम्भ राष्ट्रपिता को उनके युवाओं में अट्टू विश्वास की श्रंद्धाजलि का स्वरूप है। अपने शैशव से यौवन की यात्रा में एन.एस.एस. ने शैक्षिक परिसरों को समाज से जोड़ने का कार्य किया है तथा सार्वजनिक हित की अनेक योजनाएँ क्रियािन्वत की है। राष्ट्रीय सेवा योजना का प्रमुख उद्देश्य यह है कि छात्र शिक्षा के साथ-साथ समाज सेवा के माध्यम से अपने व्यक्तित्व का विकास करें और राष्ट्रभक्त एवं योग्य नागरिक बने।
कार्यक्रम को अभिनव बनाने के लिए राष्ट्रीय एकता, एड्स के प्रति जागरूकता, बस्ती गोद लेने की अनिवार्यता, साक्षरता, पर्यावरण संरक्षण, महिला विकास एवं उत्थान तथा बंजर भूमि विकास एवं उत्थान तथा बंजर भूमि विकास, राष्ट्र / प्रदेश के द्वारा संचालित विकास कार्यक्रमों की जानकारी देने आदि कार्यक्रमों को एकीकृत रंग में एन.एस.एस. के साथ जोड़ा गया है। एन.एस.एस. के साथ जुड़कर छात्र / छात्राएँ ऐसे महत्वपूर्ण विषयों के बारे में जागरूक हो सकते है तथा इस प्रकार समाज मे एक अनुक्रियाशील नागरिक बन सकते हैं।
एन.एस.एस. के छात्रों को नियमित गतिविधियों के अन्तर्गत दो वर्ष में 240 धंटे अपनी रूचि के क्षेत्र में कार्य करना होता है। नियमित गतिविधियों में छात्रों के लिए विभिन्न विषयों पर पुनर्विन्यास, वाद-विवाद, आशुभाषण, क्विज, जागरूकता आदि कार्यक्रम महाविद्यालय / बस्तियों में आयोजित किए जाते हैं तथा एक दस दिवसीय विशेष शिविर में भाग लेना होता है। उत्कृष्ट कोटि का कार्य करने वाले स्वयं सेवकों को प्रत्येक वर्ष राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार एवं सम्मान प्रदान किया जाता है।
हमारे महाविद्यालय में राज्य सरकार द्वारा एन.एस.एस. की 04 इकाईयां स्वीकृत है, जिनमें प्रत्येक वर्ष 400 छात्र पंजीकृत किए जाते हैं। इस महाविद्यालय द्वारा निम्नलिखित बस्तियां गोद ली गई है :-
1. कलन्दर बस्ती
2. अन्नपूर्णा
3. बखियापुरा
4. जिन्सी
एन.एस.एस. गतिविधियों में भाग लेने के लिए कोई पंजीकरण शुल्क देय नहीं है परन्तु इच्छुक छात्र/छात्रा को एक आवेदन पत्र भरना आवश्यक है, जो महाविद्यालय के एन.एस.एस. कार्यक्रम अधिकारी डॉ. प्रेम शंकर शर्मा, डॉ. के. एल. गुर्जर, डॉ. जी. सी.मीणा, प्रो. एन. आर. हिंगोनिया से नि:शुल्क प्राप्त किया जा सकता है।